तिरुपति मंदिर के प्रसाद में गाय, सूअर की चर्बी और फिश आयल

चन्द्रभान पाल
भगवान, सरकार, सारी खुफिया एजेंसियां किसी को कुछ नहीं पता-
जब से चन्द्राबाबू नायडू ने तिरुपति मंदिर के प्रसाद का टेस्ट कराकर उसमें गाय, सूअर की चर्बी और फिश आयल होने का खुलासा किया है हालांकि यहाँ चन्द्राबाबू ने भी संवेदनहीनता दिखाई क्योंकि रिपोर्ट दो महीने पहले ही आ गई थी खुलासा अब किया है।
पीएम मोदी ने अयोध्या में जो बड़े बाजे गाजे के साथ प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम करवाया था उसमें भी तिरुपति मंदिर से ही लड्डू आये थे लेकिन किसी को कुछ नहीं पता।
कैसे कोई कंपनी इतना बड़ा दुस्साहस कर सकती है?
यह राज्य सरकार की ही नहीं केन्द्र सरकार का भी निकम्मापन है।
जिस भगवान के पास लोग अपने कल्याण की आस लिए जाते हैं उसे भी नहीं पता चला कि जिन लड्डुओं का उसे भोग लगाया जा रहा है उसमें गाय, सूअर की चर्बी आदि मिली हुई है। न तिरुपति के बालाजी को पता चला न अयोध्या के राम को और कुछ राक्षस काफी दिनों से उन्हें और उनके भक्तों को अभक्ष्य खिलाते रहे। और मोदी जी के फूड चेक करने वाली सरकारी मशीनरी चद्दर तानकर सोती रही।
इस प्रकरण से दो बातें बिल्कुल साफ हो गई हैं।
एक तो भगवान नाम की कोई शक्ति नहीं है, भगवान होता तो कम से कम यह सब तो नहीं होने देता, लेकिन यह सब लगातार हो रहा है इसका मतलब इस दुनिया में भगवान नाम की कोई चीज नहीं है जो कुछ हो रहा है उसके नाम पर सिर्फ फ्राड हो रहा है गाय सूअर की चर्बी वगैरह का मामला फ्राड के अंदर का फ्राड है।
दूसरी यह कि आर एस एस और भाजपा सिर्फ धर्म के नाम पर जनता को गोलबंद करके उनका वोट लेकर सत्ता प्राप्त करना चाहते हैं उन्हें न धर्म की चिंता है न धर्म भीरु जनता की भावनाओं की, उनकी सारी भूमिका राजनीतिक नफे नुकसान से ही तय होती है।
अब जनता को जागरूक होना होगा ताकि प्रसाद के नाम पर फिर कोई उन्हें ऐसे अभक्ष्य पदार्थ न खिला सके उसके लिए लोगों को तर्कवादी बनना पड़ेगा , वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना होगा उसके लिए समतावादी महापुरुषों फुले साहू अंबेडकर पेरियार को पढ़ना होगा।
संत गाडगे बाबा की बात आज सच साबित हो रही है कि मंदिरों में भगवान नहीं पंडे पुजारियों का पेट रहता है।
आखिर भगवान रहता तो उसके नाम पर इतना बड़ा अनर्थ कैसे होने देता?
चन्द्रभान पाल (बी एस एस)
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